Essay In Hindi On Samay Ka Mahatva

Hindi Essay on Time

समय हमारी सफलता का आधार हैं। अगर हम सही समय पर सही फैसले नहीं लेंगे, तो दुसरो से पीछे निकल जायेगे। अगर हम समय के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चलेगे तब भी हम पीछे रह जायेगे।

समय के साथ चलोगे तो सफलता मिलेगी और अगर समय के साथ नहीं चल पाये तो हमेशा अपने आपको पीछे पाओगे। समय को हम रोक नहीं सकते और ना ही बीते हुये समय को वापिस ला सकते हैं। इसलिए हमें अपने समय का सही उपयोग करना चाहिए और समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिये।

अफ़सोस की बात तो यह हैं, कि समय इतना अमूल्य हैं, तब भी लोग इसके महत्व को पूरी ज़िन्दगी नहीं समझ पाते। और जब ज़िन्दगी के अंतिम पड़ाव में होते हैं, जो इसी समय की कमी का रोना रोते हैं। जो लोग समय को महत्त्व नहीं देते, उनके पास अंत में पछतावे के आलावा कुछ नहीं बचता।

समय अपनी गति को ना तो किसी व्यक्ति के लिये तेज करता हैं, और ना ही किसी व्यक्ति की लिये समय अपनी गति को धीरे करता। वह निरंतर अपनी गति के अनुसार आगे बढ़ता रहता हैं। जो लोग सफल होते हैं, वो अपने समय का अन्य लोगो की अपेक्षा अधिक उपयोग करते हैं, और दुसरो के पीछे छोड़ते हुये आगे निकल जाते हैं।

थॉमस ऐल्वा एडीसन ये नाम तो आप सभी ने सूना ही होगा। थॉमस ऐल्वा एडीसन अपने समय का पूरा सदुपयोग करते थे, जिसके कारण ही वे महान और सफल वैज्ञानिक बन पाये। क्योंकि सफल वैज्ञानिक बनने से पहले उन्होंने 2500 से अधिक अविष्कार किये, जिन्हें करने में उनका काफी समय लगा। ये तभी संभव हो पाया जब उन्होंने अपने समय का सही दिशा में अधिक से अधिक सदुपयोग किया।

लोगो की सबसे बड़ी समस्या यह होती हैं, कि वे बीते हुये कल के बारे में सोचकर या फिर आने वाले कल की फिक्र करके अपने आज वाले उस समय को बर्बाद कर देते हैं, जो उनके हाथ में हैं। उन्हें पता ही नहीं होता कि वो उस समय को गवा रहे हैं, जिसके बारे में सोचकर वो कुछ समय पहले अपने आज को गवा चुके हैं, और कुछ समय बाद इसी समय के लिये अपने आने वाले समय को गवा देगे। आने वाले कल का अर्थ हैं वह आज जो हमारे हाथ में हैं, बीते हुये कल का मतलब हैं वह आज जो धीरे धीरे हमारे हाथ से गुजर रहा हैं।

विद्यार्थी जीवन प्रेत्यक मनुष्य के लिये सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता हैं। एक तरह से देखा जाये तो यह समय इंसान की पूरी ज़िन्दगी को निर्धारित कर देता हैं। विद्यार्थी जीवन में जो व्यक्ति अपने समय का पूरी तरह से सदुपयोग करता हैं, वह अपनी पूरी लाइफ मजे से जीता हैं, और जो व्यक्ति इस समय को खराब करता हैं, वह पूरी ज़िन्दगी ठोकरे खाता हैं। दुःख की बात यह हैं, कि सबसे अधिक लोग इसी समय को खराब करते हैं, वह यह समझना ही नहीं चाहते, कि वो जो समय आज गवा रहे हैं, वो लौटकर कभी वापिस नहीं आयेगा। वो ये समझना ही नहीं चाहते, कि यह समय उनके भविष्य की नीव हैं, और नीव कमजोर हो, तो कितना भी सुन्दर महल बना लो, वह अधिक समय तक टीक नहीं पाता।

समय भगवान का ही रूप हैं, इसीलिए इसे काल कहा जाता हैं। जो काम करने की हम योग्यता रखते हैं, अगर हम वो काम समय रहते नहीं करते, तो हम अपनी योग्यता वाले काम भी नहीं कर पाते। क्योंकि समय पर काम ना करने पर काम बढ़ता जाता हैं, धीरे धीरे काम का बोझ इतना बढ़ जाता हैं, कि वो हमेशा उठाया ही नहीं जाता। भगवान सबको 24 देता हैं, चाहे वो अमीर हो या गरीब जो लोग समय का सही उपयोग करते हैं, वो धीरे धीरे दूसरे लोगो से आगे निकल जाते हैं।

समय से सर्दी का का मौसम आता हैं, समय से गर्मी का। समय से धुप निकलती हैं, समय से बारिश होती हैं। समय से जन्म होता हैं, समय से मृत्यु। पूरी सृष्टि समय से चलती हैं। अगर हम इस सृष्टि को चलाने वाले समय का ही महत्त्व नहीं समझेगे, तो हम कभी आगे नहीं जा सकते।

दोस्तों आपको हमारा समय से जुड़ा आर्टिकल कैसा लगा, हमें जरूर बताये। हमने अपने आर्टिकल के माध्यम से समय के महत्व को समझाने की पूरी कोशिश की हैं , अगर हमारी इस कोशिश में कोई कमी रह गयी हो तो हमें जरूर बताये। अगर आप हमें अपना कोई आर्टिकल या स्टोरी भेजना चाहते हैं, तो हमें हमारी Email Id पर Mail करे। हमारी Id हैं [email protected]
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Time and tide wait for none

समय का सदुपयोग Hindi Essay on Time

समय, सफलता की कुंजी है। समय का चक्र अपनी गति से चल रहा है या यूं कहें कि भाग रहा है। अक्सर इधर-उधर कहीं न कहीं, किसी न किसी से ये सुनने को मिलता है कि क्या करें समय ही नही मिलता। वास्तव में हम निरंतर गतिमान समय के साथ कदम से कदम मिला कर चल ही नही पाते और पिछङ जाते हैं। समय जैसी मूल्यवान संपदा का भंडार होते हुए भी हम हमेशा उसकी कमी का रोना रोते रहते हैं क्योंकि हम इस अमूल्य समय को बिना सोचे समझे खर्च कर देते हैं।

विकास की राह में समय की बरबादी ही सबसे बङा शत्रु है। एक बार हाँथ से निकला हुआ समय कभी वापस नही आता है। हमारा बहुमूल्य वर्तमान क्रमशः भूत बन जाता है जो कभी वापस नही आता। सत्य कहावत है कि बीता हुआ समय और बोले हुए शब्द कभी वापस नही आ सकते। कबीर दास जी ने कहा है कि,

काल करै सो आज कर, आज करै सो अब।
पल में परलै होयेगी, बहुरी करेगा कब।।

सच ही तो है मित्रों, किसी भी काम को कल पर नही टालना चाहिए क्योंकि आज का कल पर और कल का काम परसों पर टालने से काम अधिक हो जायेगा। बासी काम, बासी भोजन की तरह अरुचीकर हो जायेगा। समय जैसे बहुमूल्य धन को सोने-चाँदी की तरह रखा नही जा सकता क्योंकि समय तो गतिमान है। इस पर हमारा अधिकार तभी तक है जब हम इसका सदुपयोग करें अन्यथा ये नष्ट हो जाता है। समय का उपयोग धन के उपयोग से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि हम सभी की सुख-सुविधा इसी पर निर्भर है।

चाणक्य के अनुसार- जो व्यक्ति जीवन में समय का ध्यान नही रखता, उसके हाँथ असफलता और पछतावा ही लगता है।

समय जितना कीमती और वापस न मिलने वाला तत्व है उतना उसका महत्व हम लोग प्रायः नही समझते। परन्तु जो लोग इसके महत्व को समझते हैं वो विश्व पटल के इतिहास पर सदैव विद्यमान रहते हैं।

“ईश्वरचन्द्र विद्यासागर समय के बङे पाबंद थे। जब वे कॉलेज जाते तो रास्ते के दुकानदार अपनी घङियाँ उन्हे देखकर ठीक करते थे।“

“गैलेलियो दवा बेचने का काम करते थे। उसी में से थोङा-थोङा समय निकाल कर विज्ञान के अनेक आविष्कार कर दिये।“

“घर-गृहस्थी के व्यस्त भरे समय में  हैरियट वीचर स्टो ने गुलाम प्रथा के विरुद्ध आग उगलने वाली पुस्तक “टॉम काका की कुटिया” लिख दी जिसकी प्रशंसा आज भी बेजोड़ रचना के रूप में की जाती है।“कहने का आशय है कि प्रत्येक विकासशील एवं उन्नतशील लोगों में एक बात समान है- समय का सदुपयोग।

समय का प्रबंधन प्रकृति से स्पष्ट समझा जा सकता है। समय का कालचक्र प्रकृति में नियमित है। दिन-रात, ऋतुओं का समय पर आना-जाना है । यदि कहीं भी अनियमितता होती है तो विनाष की लीला भी प्रकृति सीखा देती है। समय की उपेक्षा करने पर कई बार विजय का पासा पराजय में पलट जाता है। नेपोलियन ने आस्ट्रिया को इसलिए हरा दिया कि वहाँ के सैनिकों ने पाँच मिनट का विलंब कर दिया था, लेकिन वहीं कुछ ही मिनटो में नेपोलियन बंदी बना लिया गया क्योंकि उसका एक सेनापति कुछ विलंब से आया। वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन की पराजय का सबसे बङा कारण समय की अवहेलना ही थी। कहते हैं खोई दौलत फिर भी कमाई जा सकती है। भूली विद्या पुनः पाई जा सकती है किन्तु खोया हुआ समय पुनः वापस नही लाया जा सकता सिर्फ पश्चाताप ही शेष रह जाता है।

समय के गर्भ में लक्ष्मी का अक्षय भंडार भरा हुआ है, किन्तु इसे वही पाते हैं जो इसका सही उपयोग करते हैं। जापान के नागरिक ऐसा ही करते हैं, वे छोटी मशीनों या खिलौनों के पुर्जों से अपने व्यावसायिक कार्य से फुरसत मिलने पर नियमित रूप से एक नया खिलौना या मशीनें बनाते हैं। इस कार्य से उन्हे अतिरिक्त धन की प्राप्ति होती है। उनकी खुशहाली का सबसे बङा कारण समय का सदुपयोग ही है।

समर्थ गुरू स्वामी रामदास कहते थे कि-

एक सदैव पणाचैं लक्षण।
रिकामा जाऊँ ने दो एक क्षण।।

अर्थात, “जो मनुष्य वक्त का सदुपयोग करता है, एक क्षण भी बरबाद नही करता, वह बड़ा सौभाग्यवान होता है।“

समय तो उच्चतम शिखर पर पहुँचने की सीढी है। जीवन का महल समय की, घंटे-मिनटों की ईंट से बनता है। प्रकृति ने किसी को भी अमीर गरीब नही बनाया उसने अपनी बहुमुल्य संपदा यानि की चौबीस घंटे सभी को बराबर बांटे हैं। मनुष्य कितना ही परिश्रमी क्यों न हो परन्तु समय पर कार्य न करने से उसका श्रम व्यर्थ चला जाता है। वक्त पर न काटी गई फसल नष्ट हो जाती है। असमय बोया बीज बेकार चला जाता है। जीवन का प्रत्येक क्षण एक उज्जवल भविष्य की संभावना लेकर आता है। क्या पता जिस क्षण को हम व्यर्थ समझ कर बरबाद कर रहे हैं वही पल हमारे लिए सौभाग्य की सफलता का क्षण हो। आने वाला पल तो आकाश कुसुम की तरह है इसकी खुशबु से स्वयं को सराबोर कर लेना चाहिए।

फ्रैंकलिन ने कहा है – समय बरबाद मत करो, क्योंकि समय से ही जीवन बना है।

ये कहना अतिशयोक्ति न होगी कि, वक्त और सागर की लहरें किसी की प्रतिक्षा नही करती। हमारा कर्तव्य है कि हम समय का पूरा-पूरा उपयोग करें।

धन्यवाद !

अनिता शर्मा
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